March 3, 2024

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Someone please return our son. , Waiting for the lamps of the house for 13 years

Someone please return our son. , Waiting for the lamps of the house for 13 years

कोई तो लौटा दो हमारे लाल . . .

कोई तो लौटा दो हमारे लाल . . .

Someone please return our son. , Waiting for the lamps of the house for 13 years

Someone please return our son. , Waiting for the lamps of the house for 13 years
Someone please return our son. , Waiting for the lamps of the house for 13 years

 

नही खोज पाई एसओजी,याद आते ही आ जाते है आखो में आंसू

कोई तो लौटा दो हमारे लाल . . .

13 वर्ष से घर के चिरागों का इंतजार
नही खोज पाई एसओजी,याद आते ही आ जाते है आखो में आंसू

मण्ड्रेला. 13 साल पहले 26 व 27 जून 2009  के दिन हमारे कलेजे के टुकड़े लापता हुए थे।हर दफ्तर में दस्तक दी।मंदिरों व देवरों में गए।कई उपवास किए।लेकिन ना तो हमारे लाल मिले ना ही उनकी कोई सूचना।

पता नही किस हाल में होगा मेरा लाडला. .।उससे क्या करवा रहे होगें।समय पर खाना भी मिलता होगा या नही।यह कहते-कहते गला भर आता है।

और आंखो से आंसू टपकने लगते है।

कस्बे से 13 साल पहले लापता हुए दो मासूमों के परिजनों का आज भी ऐसा ही हाल है 26 व 27 जून 2009 को महेन्द्र भार्गव का बेटा रोहित भार्गव 5 व सुधीर निर्वाण का बेटा गौरव निर्वाण 5 अचानक रहस्यमय तरीके से लापता हो गए थे।जिनके गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस थाना पिलानी में मुकदमा न.11-12 /27 जून को एवं 30जून को मुकदमा न.190-191 अपहरण का मामला दर्ज करवाया गया।इसके बाद ग्रामीणों के विरोध एवं कस्बे बन्द के कारण मामला एसओजी को सौंपा गया।अभी तक एसओजी भी दोनों बच्चों का पता नही लगा पाई है।

वही अपहरण के बाद परिजनों ने जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक हर जगह बच्चों को तलाश करने के लिए गुहार लगाई।संतरी से लेकर मंत्री तक ज्ञापन दिया,लेकिन आज तक कोई सुराग नही लगा।
बोम्बे अस्पताल के पूर्व निदेशक व मण्ड्रेला नगर विकास परिषद मुम्बई के अध्यक्ष पदमश्री चिरंजीलाल जोशी के मंत्रियो से लेकर उच्च अधिकारियों को कस्बे में लापता हुए बच्चों के बारें में पत्र लिखा जिसके कारण तत्कालीन आईजी एमएल लाठर ने मण्ड्रेला कस्बे का दो बार दोरा करने के उपरान्त मण्ड्रेला चोकी को थाने में बदला गया पर चोकी से थाना बनने के बाद भी पुलिस ने आज तक अपह्त बच्चो का कोई सुराग नही लगा पाया।और बच्चों के बारें में बात करने पर मामला एसओजी में होने की कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते है।

 

रोहित भार्गव
रोहित भार्गव
गौरव निर्वाण
गौरव निर्वाण

2017 में जगी थी आस एक बच्चा मिला था हरियाणा के सिरसा में

मण्ड्रेला.कस्बे में 13 साल पहले जून 2009 में दो मासूम बालक रोहित भार्गव (5 ) और गौरव निर्वाण गुम हो गए थे।जिनकी तलाश में पुलिस ने रात दिन एक कर दिए थे फिर भी कोई सुराग नहीं मिला।ग्रामीणों की मांग पर मामला एसओजी में चला गया था। परन्तु एसओजी भी मामले का खुलासा नहीं कर पाई थी।परिजनों ने भी बच्चों के मिलने की उम्मीद खो दी थी।अचानक 2017 में नवम्बर महा में रोहित भार्गव के परिवार से बबलू भार्गव अपने ससुराल भटिंडा गया था।सिरसा रेलवे स्टेशन पर उसे अपने परिवार में गुम हुए रोहित के शक्ल का बच्चा मिला।सक्ल सुरत मिलने एवं रेल्वे स्टेशन पर लावारिस मिलने पर पुलिस को सूचित कर उक्त बच्चें को बबलू भार्गव मण्ड्रेला ले आया।थाने में उसे परिजनों और अन्य जानकारों ने पहचान लिया।तब से बच्चा महेन्द्र भार्गव के घर ही रह रहा था।
उक्त मामले में पुरी जानकारी लेने हेतू जब पुलिस सिरसा पहुंची तो लापता बच्चा रोहित भी कोई ओर निकला।सिरसा की सडक़ों पर रोहित के लापता होने के पोस्टर लगे मिले।उक्त पोस्टर में मिले नम्बरों पर जानकारी करने पर वह रोहत भार्गव नही रोहित पुत्र रोशनलाल गांव मीरपुर कॉलोनी एयर फोर्स स्टेशन के सामने सिरसा निकला।पुलिस टीम उक्त जगह जाकर उसके परिजनों से मिली एवं बच्चें रोहित को लेकर बुधवार देर रात मण्ड्रेला पहुंच गई।
यह बच्चा रोहित भार्गव नहीं है यह रोहित कुमार है।सिरसा थाने में इसकी 28 अक्टूबर को लापता होने की रिपोर्ट दर्ज है।सीरसा में दिवारों पर इसके गुमसुदगी के पम्पलेट लगे हुए है।पुलिस इसके माता-पिता से भी मिलकर आई है।इसके पिता का नाम रोशनलाल है।इसके माता-पिता ने इसे पहचान लिया है।तब रोहित को झुंझुनू के बाल संरक्षण गृह में भेज दिया।कुछ दिनों बाद रोहित की डीएनए रिपोर्ट आई जिसमें उक्त बालक रोहित भार्गव ना होकर रोहित कुमार सिरसा निकला जिसपर पुलिस ने उक्त बच्चे को उनके माता पिता को सौप दिया।तब से लेकर आज तक इस मामले में कोई सफलता नही मिली है।मामला आज भी एसओजी में चल रहा है।पर दो परिवारों के चिराग 13 साल के बाद आज भी अपने घर से दुर है।

 

 

कस्बे में 27 जून 2009 को दो मासूम बालक लापता हो गए थे।आज 13 साल बीत जाने के बाद भी लापता मासुमों का कोई सुराग नही लग पाया है।सुधीर निर्वाण ने बताया कि 27 जून 2009 के दिन ही मेरा पुत्र गौरव निर्वाण सुबह नो बजे एवं एक दिन पहले 26 जून 2009 शाम को पुलिस चौकी के सामने से रोहित भार्गव पुत्र महेन्द्र भार्गव लापता हुए थे।जिनके गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस थाना पिलानी में मुकदमा न.11-12 27 जून को एवं 30जून को मुकदमा न.190-191 अपहरण का मामला दर्ज करवाया था।अपहरण के दिन से आज तक उन मासूमों का कोई सुराग नही लग पाया है।वही अपहरण के बाद ग्रामीणों ने कस्बे को बन्द करने से लेकर जिला कलक्टर से लेकर मंत्रियो तक ज्ञापन और विरोध जता चुके है।लेकिन बच्चो का कोई सुराग नही लगा पाए।इस दौरान 25 अगस्त 2009 को ग्रामीणों का एक दल तातकालिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिलकर उक्त विषय में जानकारी दी जिसपर मुख्यमंत्री ने ततकाल प्रभाव से क्रमाक1519 न. का पत्र प्रेषित कर इस अपहरण के केश को एसओजी को दे दिया।उसके बाद एसओजी टीम कस्बे में आई लापता बच्चों के परिजनों से मिलकर संदिंध लोगों से पूछताछ की रात भर टीम कसबे में रही उसके बाद भी टीम के लोग कसबे में आते जाते रहे लेकिल एसओजी भी आज तक उन मासूम बालकों को कोई सुराग लगाने में नाकाम रहा है। वही इस बाबत लापता बच्चों के परिजनों से उन मासुमों के बारें में बात करते है तो आज भी उनकी आंखों में आंसू आ जाते है।और उनकी पुरानी यादों में खो जाते है।

 

 

 

 

 

 

 

 

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