June 13, 2024

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गोपालदास जी का मंदिर

गोपालदास जी का मंदिर

झुंझुनूं से आए धत्तरवाल परिवारों ने बसाया था धत्तरवाल गांव

झुंझुनूं से आए धत्तरवाल परिवारों ने बसाया था धत्तरवाल गांव

Dhattarwal village was established by the Dhattarwal families who came from Jhunjhunu.
Dhattarwal village was established by the Dhattarwal families who came from Jhunjhunu.
Dhattarwal village was established by the Dhattarwal families who came from Jhunjhunu.

गुरु शिष्य ने की अनूठी पहल एनजीओं के तहत गांव में फँला रहे जागरूकता

झुंझुनूं से आए धत्तरवाल परिवारों ने बसाया था धत्तरवाल गांव
मण्ड्रेला. जिला मुख्यालय से 27 किलोमिटर एवं पंचायत समिति चिड़ावा से 16 किलोमिटर दूरी पर पांच सौ घरों की आबादी में बसा हुआ है गांव धत्तरवाला जो वर्तमान में ग्राम पंचायत भी है गांव में मुख्य तह सभी जातियों का निवास है व सभी मिलजुल कर रहते है।गांव के पूर्व शिक्षक सुरजाराम धत्तरवाल,विद्याधर शर्मा,मनरूप धत्तरवाला,रामसिंह पायल,विश्वेश्वरलाल शर्मा,उपेन्द्र धत्तरवाल ने बताया कि करीब पांच सौ साल पहले झुंझुनूं में मुस्लिम सांसकों से तंग आकर धत्तरवाल (जाट) परिवार ने शेखावाटी की गंगा काटली नदी के किनारे धत्तरवाला गांव बसाया था।गांव में मुख्य तह सभी जातिया है परंतु जाट समाज के अधिक घर है।ग्रामीणों के अनुसार गांव में ब्राह्मण समाज के निमहेड़ा टोंक से तो कुमावत समाज के बगड से,पायल गोत्र के जाट ढाढोत चिड़ावा़ से आकर बसे घीरे धीरे गांव में सभी जातियों ने अपना निवास स्थान बना लिया।
खेती-बाड़ी और सरकारी नौकरी
ग्रामीणों के अनुसार लोगों का मुख्य पेशा कृषि और पशुपालन है।अधिक्तर घर खेतों में रहते है।वह वर्तमान में गांव की सीमा में 150 से अधिक खेतों में कुओं से सिचाई कर खेती होती है।जो लगभग सभी घरों के आजिविका का साधन है।गांव में खेती के साथ साथ सरकारी विभागों में भी अपनी पकड़ बना रखी है।ंवर्तमान में 70 से अधिक सरकारी कर्मचारी कार्यरत है जिसमें सबसें अधिक सेना,पुलिस शिक्षा विभाग में कार्यरत है।इसके साथ गांव का एक बेटा विक्रम सिंह धत्तरवाल जीएसटी विभाग औरंगाबाद में अधिक्षक पद पर तो डॉ. उम्मेद सिंह धत्तरवाला दिल्ली एम्स में अस्सिस्टेंट प्रोफेसर (कार्डियक सर्जिकल इंटेंसिव केअर) के पद पर सेवारत है।संजय सिंह गुजरात में न्यायधीस के पद पर तो गांव बहु सुनिता धत्तरवाला प्रधानाचार्य तो व्याख्याता पद पर नरेन्द्र सिंह,औकारमल,अमीलाल,सज्जन झाझडिय़ा,विकास धत्तरवाल,ओमप्रकाश कार्यरत है।
आस्था के केन्द्र
गांव में मुख्य तह ठाकूर जी का मंदिर,गोपालदास जी का मंदिर,गोसाई जी का मंदिर, सहित अन्य देवी देवताओं के मंदिर बने हुए है जिसमें गोसाई जी के मंदिर पर आसोज कृष्ण पक्ष की दूज को मेला लगता है जिसमें विभिन्न खेल कूद प्रजियोगिताए होती है।जिसमें से मुख्य कुश्ती होती है जिसमें अन्य राज्यों के पहलवान भी दगल करते आते है।करीब तीन सौ साल पहले गांव रसोड़ा से आए दादा गोपालदास ने गावं में तपस्या कर जीवत समाधी ली थी जिस पर चार फरवरी 2013 को समाधी स्थल का जिर्णोद्वार कर ग्रामीणों ने मंदिर बना मुर्ति स्थापना कर दी।स्थापना दिवस से ही मंदिर प्रागण में हर वर्ष स्थापना दिवस पर गांव की ओर से हर वर्ष मेले के साथ बड़े भंडारे का आयोजन होता है।गोपालदास के मंदिर के पास ही गांव के मुख्यजन उम्मेदादा की छतरी बनी हुई है।

गोपालदास जी का मंदिर
गोपालदास जी का मंदिर

गांव की सान हवेलिया बनी खड्डर
गांव के स्थापना के गांव में धत्तरवाल परिवार के किशनाराम गांव में बड़ी बड़ी दो हवेलिया बनाई गई थी जो वर्तमान में खड्डरों में तपदील होगई है।ग्रामीणों का कहना है इन हवेलियों में पंचास से अधिक कमरे थे एवं दो मंजिला थी।जिनमें से परिवार बड़े होने पर घीरे घीरे खेतों में जाकर रहने लगे एवं हवेलिया खड्डरों में बदल गई।ग्रामीणों के अनुसार जागिरदारी के समय भ्रमण के दौरान जागिरदार इन्ही हवेलियों में रूकते थे।

गोपालदास जी का मंदिर
जिला मुख्यालय से 27 किलोमिटर एवं पंचायत समिति चिड़ावा से 16 किलोमिटर दूरी पर पांच सौ घरों की आबादी में बसा हुआ है गांव धत्तरवाला जो वर्तमान में ग्राम पंचायत भी है

गुरु शिष्य ने की अनूठी पहल एनजीओं के तहत गांव में फँला रहे जागरूकता
ऐम्स नई दिल्ली में कार्यरत डॉ. उम्मेद सिंह ने बताया कि उनके स्व. पिता सज्जन सिंह धत्तरवाल के साथी एवं उनके गुरु ओंकारमल ने गांव में सज्जन सेवा समिति के नाम से एक एनजीओं चला रहे है।जिसके तत्वावधान में समाज के सभी वर्गों के सर्वांगीण विकास व जीवन के हर पड़ाव को बेहतर बनाने से सम्बंधित गतिविधियों का आयोजन नियमित रूप से करवाया जाता हैं। यह संस्था समाजिक न्याय के लिए गांव में एक उचित मंच प्रदान करने के साथ आपसी भाईचारे व सौहार्द को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों का आयोजन नियमित रूप से करवाती हैं।युवाओं को उच्चशिक्षा के लिए उपयुक्त विषय सुझाने से लेकर बदलते परिवेश में रोजगार के विभिन्न विकल्पों से अवगत करवाने में भी संस्था अग्रणी रही है।समाज मे जागरूकता लाने की दिशा में आयोजित किये गए राष्ट्रीय सतर्कता सप्ताह व बाल अधिकार दिवस के तहत गत वर्ष के उलेखनीय कार्य किए गए।क्षेत्र में खेल कूद को बढ़ावाा देने के लिए खेल सुविधाओं का निर्माण व रखरखाव में संस्था के सदस्यगण नियमित भागीदारी निभा रहे है।जल व पर्यावरण सरंक्षण, समाज मे फैलती नशे व जुए की लत आदि के विषय मे मुहिम चलने को समिति ने इस वर्ष का मुख्य लक्ष्य रखा है।
प्रार्यावरण प्रेमी
गांव के स्थापना से ही ग्रामीण प्रार्यावरण प्रेमी एवं जल संचय प्रेमी थे।गांव में बने गोसाई जी के मंदिर के पास गांव का खेल मैदान के साथ ही ग्रामीणों की ओर से तीन तलाब बनाए हुए है जिसमें से एक प्राचिन तालाब है।बरसात के मौसम में काटली नदी के उफान से उक्त तालाब पानी से भर जाता था जो गर्मी के मौसम में काम आता था।वही मंदिर परिसर सहित गांव के सभी मुख्य स्थानों सहित खेतों में पौधें लगा रखें है।
सुविधाएं
गांव में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय,एक प्राधमिक विद्यालय,खेल मैदान,पंचायत भवन,उप स्वास्थ्य केन्द्र,पटवारी घर, पशु उप स्वास्थ्य केन्द्र,्र आदि है।
समास्याएं
गांव में कुछ सुविधाओं के साथ साथ कुछ समास्याए भी है।जिसमें मुख्य गांव से गंदे एवं बरसाती पानी की निकासी,आवारा पशुओं की भरमा,सरकारी स्कूल में विज्ञान संकाय,खैल मैदान में संसाधनों की कमी,गांव में नशें की लत आदि है।

 जिला मुख्यालय से 27 किलोमिटर एवं पंचायत समिति चिड़ावा से 16 किलोमिटर दूरी पर पांच सौ घरों की आबादी में बसा हुआ है गांव धत्तरवाला जो वर्तमान में ग्राम पंचायत भी है
जिला मुख्यालय से 27 किलोमिटर एवं पंचायत समिति चिड़ावा से 16 किलोमिटर दूरी पर पांच सौ घरों की आबादी में बसा हुआ है गांव धत्तरवाला जो वर्तमान में ग्राम पंचायत भी है
जिला मुख्यालय से 27 किलोमिटर एवं पंचायत समिति चिड़ावा से 16 किलोमिटर दूरी पर पांच सौ घरों की आबादी में बसा हुआ है गांव धत्तरवाला जो वर्तमान में ग्राम पंचायत भी है

 

 

 

 

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