February 26, 2024

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Supreme Court grants bail to Godhra carnage convict Farooq after 17 years, Gujarat government protests

Supreme Court grants bail to Godhra carnage convict Farooq after 17 years, Gujarat government protests

सुप्रीम कोर्ट ने गोधरा कांड के दोषी फारुक को दी 17 साल बाद जमानत,गुजरात सरकार ने किया विरोध

सुप्रीम कोर्ट ने गोधरा कांड के दोषी फारुक को दी 17 साल बाद जमानत,गुजरात सरकार ने किया विरोध

Supreme Court grants bail to Godhra carnage convict Farooq after 17 years, Gujarat government protests

Supreme Court grants bail to Godhra carnage convict Farooq after 17 years, Gujarat government protests
Supreme Court grants bail to Godhra carnage convict Farooq after 17 years, Gujarat government protests

 

2002 में हुआ था जघन्य अपराध

दिल्ली- गोधरा ट्रेन अग्निकांड मामले से जुड़ी खबर, दोषी फारुक को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी, गोधरा ट्रेन अग्निकांड के दोषी फारुक को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी, मुख्य अपील पर बाद में होगी बाकी दोषियों की जमानत पर सुनवाई, 17 साल से जेल में होने के आधार पर दी जमानत.

नई दिल्ली. गोधरा कांड मामले में गुजरात सरकार के कड़े विरोध के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद काट रहे एक दोषी को जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि फारूक 2004 से जेल में है। वो पिछले 17 साल जेल में रह चुका है। इसलिए उसे जमानत दी जाए। जमानत का विरोध करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह सबसे जघन्य अपराध में से एक था। लोगों को बोगी में बंद करके जिंदा जलाया गया था। सामान्य परिस्थितियों में पत्थरबाजी कम गंभीर अपराध हो सकता है, लेकिन यह अलग है। 27 फरवरी 2002 को गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के एक कोच में भीड़ ने आग लगा दी गई थी। इस घटना में 59 कारसेवकों की जलकर मौत हो गई थी। इसी के बाद गुजरात में 2002 के दंगे हुए थे। दोषी फारूक पर पत्थरबाजी और हत्या करने का मामला साबित हुआ था। इसके बाद उसे उमक्रैद की सजा सुनाई गई थी। दरअसल, गोधरा कांड के बाद चले मुकदमों में करीब 9 साल बाद 31 लोगों को दोषी ठहराया गया था। 2011 में एसआईटी कोर्ट ने 11 दोषियों को फांसी और 20 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में अक्टूबर 2017 में गुजरात हाईकोर्ट ने 11 दोषियों की फांसी की सजा को भी उम्रकैद में बदल दिया था। दोषी फारूक इन्हीं में से एक है। इससे पहले 13 मई 2022 को एक और दोषी अब्दुल रहमान धंतिया कंकट्टो जम्बुरो को 6 महीने की जमानत दी गई थी। रहमान की पत्नी को टर्मिनल कैंसर है और उसकी बेटियां मानसिक बीमार हैं। 11 नवंबर को उसकी जमानत 31 मार्च, 2023 तक बढ़ा दी गई। वह 17 साल जेल में रह चुका है, लिहाजा उसे जमानत पर रिहा किया जाए। सुप्रीम कोर्ट बाकी 17 दोषियों की अपीलों पर छुट्टियों के बाद सुनवाई करेगा।

सीजेआइ डी.वाई. चंद्रचूड़ की पीठ ने कोर्ट में लंबित अपील को लेकर दायर हस्तक्षेप आवेदन पर यह आदेश दिया। दोषी फारूक पत्थरबाजी में शामिल था। जमानत का विरोध करते हुए गुजरात सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह पत्थरबाजी नहीं थी, जघन्य अपराध था। पत्थरबाजों की मंशा यह थी कि जलती बोगी से कोई यात्री बाहर न निकल सके और बाहर से भी कोई उन्हें बचाने न जा पाए।

2002 में हुआ था जघन्य अपराध

गोधरा कांड 27 फरवरी, 2002 को हुआ था। गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एस -6 कोच में आग लगने से 59 लोगों की मौत हो गई थी। मार्च 2011 में ट्रायल कोर्ट ने 31 लोगों को दोषी ठहराया था। इनमें से 11 को मौत की सजा और बाकी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अन्य 63 आरोपियों को बरी कर दिया था। गुजरात हाई कोर्ट ने 2017 में 11 की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था।

च्चतम न्यायालय ने वर्ष 2002 में गोधरा में ट्रेन कोच को जलाने के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे एक दोषी को गुरुवार को यह कहते हुए जमानत दे दी कि वह पिछले 17 वर्षों से जेल में है. प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने दोषी फारूक की तरफ से पेश वकील की इस दलील को स्वीकार कर लिया कि जेल में अब तक बिताई गई अवधि को ध्यान में रखते हुए उसे (फारूक को) जमानत दी जानी चाहिए. शीर्ष अदालत में मामले के कई दोषियों की दोषसिद्धि के खिलाफ दायर याचिकाएं विचाराधीन हैं.

गुजरात सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह ‘सबसे जघन्य अपराध था’, जिसमें महिलाओं और बच्चों समेत 59 लोगों को जिंदा जला दिया गया था और दोषियों की याचिकाओं पर जल्द से जल्द सुनवाई किए जाने की जरूरत है. फारूक समेत कई अन्य लोगों को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के कोच पर पथराव करने का दोषी ठहराया गया था. मेहता ने कहा कि आमतौर पर पथराव मामूली प्रकृति का अपराध माना जाता है, लेकिन उक्त मामले में ट्रेन के कोच को अलग किया गया था और यह सुनिश्चित करने के लिए उस पर पथराव किया गया था कि यात्री बाहर न आ सकें.

 

 

 

 

 

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