March 3, 2024

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Only 14 out of 15 votes were in favor of the motion. The no-confidence motion against Pilani Pradhan fell by one vote, the opposition could not muster a three-fourth majority.

Only 14 out of 15 votes were in favor of the motion. The no-confidence motion against Pilani Pradhan fell by one vote, the opposition could not muster a three-fourth majority.

15 में से 14 ही मत पड़े प्रस्ताव के पक्ष में पिलानी प्रधान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव एक मत से गिरा,विपक्ष नहीं जुटा पाया तीन चौथाई बहुमत

Only 14 out of 15 votes were in favor of the motion. The no-confidence motion against Pilani Pradhan fell by one vote, the opposition could not muster a three-fourth majority.

15 में से 14 ही मत पड़े प्रस्ताव के पक्ष में पिलानी प्रधान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव एक मत से गिरा,विपक्ष नहीं जुटा पाया तीन चौथाई बहुमत

Only 14 out of 15 votes were in favor of the motion. The no-confidence motion against Pilani Pradhan fell by one vote, the opposition could not muster a three-fourth majority.
Only 14 out of 15 votes were in favor of the motion. The no-confidence motion against Pilani Pradhan fell by one vote, the opposition could not muster a three-fourth majority.

 

 

प्रधान बिरमा देवी समर्थकों ने पूर्व प्रधान चिड़ावा कैलाश मेघवाल की अगुवाई में की नारेबाजी

19 में से 15 सदस्य अविश्वास जताते तो छोड़नी पड़ती प्रधानी, 14 सदस्यों ने दिया विरोध में वोट
पिलानी पंचायत समिति प्रधान बिरमा संदीप रायला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव तीन चौथाई बहुमत नहीं होने के सोमवार को एक मत से गिर गया।

19 में से 14 सदस्य ही अविश्वास के पक्ष में वोटिंग के लिए पहुंचे। यदि 15 सदस्य होते तो प्रधान को कुर्सी छोड़नी पड़ती।

एक सदस्य कम रहने के कारण प्रधान बिरमा संदीप रायला की कुर्सी बच गई।

बता दें कि विपक्ष के सदस्यों ने जिला परिषद सीईओ जवाहर चौधरी को अविश्वास प्रस्ताव के लिए प्रार्थना पत्र दिया था। सीईओ ने अविश्वास प्रस्ताव पर बहस व मतदान के लिए 9 जनवरी की तिथि तय की थी।

इसी के तहत अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सोमवार को पंचायत समिति सदस्यों की विशेष बैठक बलाई गई। बैठक में अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 14 ही सदस्य उपस्थित हुए। जबकि 15 वोट की जरूरत थीं।

उधर अविश्वास प्रस्ताव के विरोध में एक भी मत नहीं डाला गया। इस पर उपखण्ड अघिकारी सूरजगढ़ राजेन्द्र प्रसाद ने अविश्वास प्रस्ताव एक मत से गिरने की घोषणा की।

सोमवार को पंचायत समिति परिसर में सुबह तय समय पर बहस व मतदान प्रक्रिया शुरू कराने के लिए सूरजगढ़ एसडीएम राजेंद्र आर्य पहुंच गए। इस दौरान दोपहर करीब एक 14 विपक्षी सदस्य पंचायत समिति में पहुंचे। एसडीएम ने गुप्त मतदान के लिए कहा तो विपक्षी सदस्यों ने मना कर दिया और सर्वसम्मति से हाथ उठाकर मतदान कराने को कहा। इस पर एसडीएम ने हाथ ऊपर करवाकर वोटिंग की।

जिसमें 14 सदस्यों ने ही प्रधान के खिलाफ अविश्वास जताया। ऐसे में एक सदस्य कम होने के कारण प्रधान रायला के विरुद्ध लाया गया अविश्वास प्रस्ताव गिर गया। इसके बाद एसडीएम आर्य ने अविश्वास प्रस्ताव गिरने की औपचारिक घोषणा की। तब प्रधान समर्थकों ने पूर्व प्रधान चिड़ावा कैलाश मेघवाल की अगुवाई में नारेबाजी करते हुए जश्न मनाया। प्रधान को डीजे के साथ घर ले गए। इस मौके पर पूर्व प्रधान कैलाश मेघवाल, सुरेंद्र, कानू सिंह, सुभाष हमीनपुर, परविंद्र, संदीप रायला,मंड्रेला सरपंच कुलदीप सिंह शेखावत,फारुख खान चौहान,चरण सिंह पूनिया,अय्यूब सोलंकी सहित सैकड़ों प्रधान समर्थक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

ये हुआ : अविश्वास के लिए 19 सदस्यों में से 15 की जरूरी थी, 14 ही आए
19 सदस्य वाली पंचायत समिति में प्रधान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कराने के लिए तीन चौथाई यानी 15 सदस्यों की जरूरत थी। दोपहर में जब वोटिंग हुई तब प्रधान के खिलाफ 14 सदस्य ही मौजूद रहे। एक सदस्य की कमी के कारण अविश्वास प्रस्ताव गिर गया। गौरतलब है कि पिलानी प्रधान बिरमा संदीप रायला पूर्व प्रधान कैलाश मेघवाल के खेमे की हैं।

आगे क्या : पंचायत समिति सदस्य राजकुमार फौजी बोले-कोर्ट में जाएंगे
इस मामले में विपक्षी सदस्यों का नेतृत्व कर रहे पंचायत समिति सदस्य राजकुमार फौजी ने कहा कि 19 सदस्यों का तीन चौथाई बहुमत 14.33 ही होता है। अविश्वास प्रस्ताव पारित कराने के लिए जरूरी 14 सदस्य एक साथ थे। इसके बावजूद एसडीएम ने बहुमत मानने से मना कर दिया। एसडीएम ने तीन चौथाई बहुमत 15 सदस्य मानकर उनका प्रस्ताव खारिज कर दिया। इसलिए कोर्ट में जाएंगे।

15 में से 14 ही मत पड़े प्रस्ताव के पक्ष में पिलानी प्रधान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव एक मत से गिरा

 

हाथ उठा कर किया मतदान

बैठक में प्रधान बिरमा देवी सहित कुल 15 सदस्य उपस्थित हुुए। प्रस्ताव पर चर्चा के बाद सदस्यों ने गुप्त मतदान के बजाय हाथ उठा कर मतदान करवाने की मांग की। लेकिन सक्षम अधिकारी ने इससे इनकार कर दिया। बाद में सदस्यों ने एक अविश्वास प्रस्ताव के पुराने मामले की नजीर पेश की तो अधिकारी ने हाथ उठा कर मतदान की स्वीकृति दे दी।मतदान की घोषणा के बाद 14 सदस्यों ने प्रस्ताव के समर्थन में हाथ उठाया। वहीं प्रधान बिरमा देवी ने मतदान से इनकार कर दिया। अविश्वास प्रस्ताव के एक मत से गिरने पर प्रधान बिरमा देवी के समर्थकों ने नारेबाजी की। बैठक के दौरान उपाधीक्षक चिड़ावा सुरेश शर्मा के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात रहा।

यह सदस्य हुए शामिल

पंचायत समिति के 19 सदस्यों में से इस दौरान प्रधान बिरमा संदीप रायला, सुशील दोबड़ा, अजय कुमार पीपली, रचना बनगोठड़ी,बिमला देवी लिखवा,शीशराम तनानिया डुलानिया, मिश्री देवी बनगोठड़ी, सजना देवी मोरवा,धनपति झेरली,राजेंद्र देवरोड़,राजकुमार फौजी बिगोदना, हारुना बनो मंड्रेला, अरविंद सैनी सैनीपुरा, रोहिताश्व मीणा बजावा सुरों का,सुभाष चंद्र पटेल नगर खुड़िया उपस्थित थे।

यह नहीं आए

बैठक में नरेश कुमार, सुमन कंवर, अन्नु एवं सुनील कुमार अनुपस्थित रहे।

 

सुनील का बदला मन

15 सदस्यों के हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन में ढंढार से बीजेपी की टिकिट पर पंचायत समिति सदस्य चुने गए सुनील कुमार के भी हस्ताक्षर थे। सोमवार को पंचायत समिति में प्रस्ताव पर हुई वोटिंग में सुनील कुमार वोटिंग में शामिल नहीं हुए।

भाजपा के चार सदस्यों ने भी डाले वोट

पंचायत समिति में आठ भाजपा से छह कांग्रेस से तथा पांच निर्दलीय के रूप में सदस्य हैं। भाजपा के आठ में से चार सदस्यों ने सोमवार को पार्टी के खिलाफ वोट डाले हैं।

पिलानी विधानसभा में कैलाश मेघवाल का जलवा बरकरार

पिलानी पंचायत समिति की बिरमा देवी प्रधान है। बिरमा देवी भाजपा की प्रधान है और पिलानी विधानसभा के भाजपा नेता कैलाश मेघवाल के प्रयासों का परिणाम है कि भाजपा की झोली मे यह प्रधानी आई।  कैलाश मेघवाल उस परिवार से हैं, जिनके पिता काका सुंदरलाल का नाम जिले के भाजपा के कद्दावर नेताओ मे शुमार है। उनकी लोकप्रियता व आमजन पर उनकी पकड़ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सात बार विधायक व चार बार मंत्रिमंडल में मंत्री रहे। शायद उसी करिश्माई विरासत का नतीजा है कि एक मंझे हुए राजनेता की तरह उभर कर आये है। यदि कैलाश मेघवाल के जनाधार को कमतर करके आंका जाता है तो यह उनकी भूल है। चुनावों में हार जीत होती रहती है। प्रजातांत्रिक व्यवस्था में सत्ता अंकों का खेल होती है लेकिन हार के बावजूद जमीनी स्तर पर काम करने का नतीजा है कि आज पिलानी विधानसभा में अपने कद को बरकरार रखा है ।

 

 

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