March 1, 2024

News & jobs

देश विदेश के हिंदी समाचारों सहित नोकरी Jobs देखें।

In Shri Ram Katha, the story of Ram-Sita's marriage was narrated, after listening to the story the devotees started cheering, the devotees kept dancing for hours on the musical story.

In Shri Ram Katha, the story of Ram-Sita's marriage was narrated, after listening to the story the devotees started cheering, the devotees kept dancing for hours on the musical story.

श्रीराम कथा में राम-सीता विवाह के प्रसंग की हुई कथा, प्रसंग सुनकर श्रद्धालुओं ने लगाए जयकारे, संगीतमय कथा पर घंटों झूमते रहे श्रद्धालु

In Shri Ram Katha, the story of Ram-Sita’s marriage was narrated, after listening to the story the devotees started cheering, the devotees kept dancing for hours on the musical story.

In Shri Ram Katha, the story of Ram-Sita’s marriage was narrated, after listening to the story the devotees started cheering, the devotees kept dancing for hours on the musical story.

In Shri Ram Katha, the story of Ram-Sita's marriage was narrated, after listening to the story the devotees started cheering, the devotees kept dancing for hours on the musical story.
In Shri Ram Katha, the story of Ram-Sita’s marriage was narrated, after listening to the story the devotees started cheering, the devotees kept dancing for hours on the musical story.

 

In Shri Ram Katha, the story of Ram-Sita’s marriage was narrated, after listening to the story the devotees started cheering, the devotees kept dancing for hours on the musical story.

श्रीराम कथा में राम-सीता विवाह के प्रसंग की हुई कथा, प्रसंग सुनकर श्रद्धालुओं ने लगाए जयकारे, संगीतमय कथा पर घंटों झूमते रहे श्रद्धालु

मण्ड्रेला कस्बे के लाठो के मंदिर (राणी शक्ति मन्दिर) में अयोध्या में राम मन्दिर प्राण-प्रतिष्ठा के शुभ अवसर पर चल रही नो दिवसीय दुर्लभ सत्संग एवं संगीतमय श्री रामकथा के पांचवे दिन सोमवार को कथावाचक श्री रामकृष्ण महाराज ने राम विवाह के दृश्य का रसपान कराते हुए श्रोताओं को बताया कि राजा जनक गुरु विश्वामित्र के साथ राम व लक्ष्मण को धनुष यज्ञशाला ले गए।

यहां देश-विदेश के राजा सुंदर सिंहासनों पर विराजमान थे।राजा जनक ने अपनी प्रतिज्ञा के बारे में सभी को अवगत कराया कि जो इस धनुष को तोड़ेगा उसके साथ सीताजी का विवाह होगा।सभी राजाओं ने बारी-बारी से धनुष तोड़ने का प्रयास किया,लेकिन असफल रहे।निराश राजा जनक को देखकर विश्वामित्र का इशारा पाकर भगवना श्रीराम धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाते हैं और धनुष टूट जाता है।इसके बाद श्रीराम व सीताजी एक-दूसरे के गले में वरमाल डाल देते हैं।श्री राम-सीता विवाह की कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।सोमवार को कथा के दौरान भगवान श्री राम और सीताजी की झांकी सज्जाई गई जो की आकर्षण का केंद्र रही।इस मौके पर पूर्व सरपंच सुरेश सोनी,शंकर शरण पोलीवाल,केशरदेव जांगिड़,विनोद सोनी,रतनलाल रुंगटा,किशनलाल रुंगटा,महेंद्र सेन,लीलूराम कुमावत,कर्ण सोनी,रजनीश सोनी,सांवरमल भार्गव,पुरुषोत्तम चेजारा आदि मौजूद थे।

 

 

 

 

 

 

 

————————————————Thank You For visit——————————————————-